जो चलती मेरी तो मैं दुनिया कुछ और बनाता,
या कुछ ना बनाके सुनता समय का सन्नाटा |
ना होता कुछ तो कहीं जाना ना होता, कहीं आना ना होता,
कुछ पाना ना होता, कुछ खोना ना होता,
सिर्फ होता खाली समय और समय का सन्नाटा |
ना खुदा होता ना खुदाई , ना फरियादें होती ना सुनवाई ,
ना आशाएं होती ना टुटती, ना किस्मत होती ना फूटती |
सिर्फ खाली समय होता और होता इंतज़ार का सन्नाटा ,
इंतज़ार भी किसका, सिर्फ मैं जाता और मैं ही आता |
पर क्या अभी ऐसा ही नहीं है, ये तमाशा मेरा ही नहीं है,
और कहीं मैं ही तो तमाशबीन भी नहीं |
खैर जो चलती मेरी तो मैं दुनिया कुछ और बनाता,
या शायद कुछ ना बनाके सुनता समय का सन्नाटा |
या कुछ ना बनाके सुनता समय का सन्नाटा |
ना होता कुछ तो कहीं जाना ना होता, कहीं आना ना होता,
कुछ पाना ना होता, कुछ खोना ना होता,
सिर्फ होता खाली समय और समय का सन्नाटा |
ना खुदा होता ना खुदाई , ना फरियादें होती ना सुनवाई ,
ना आशाएं होती ना टुटती, ना किस्मत होती ना फूटती |
सिर्फ खाली समय होता और होता इंतज़ार का सन्नाटा ,
इंतज़ार भी किसका, सिर्फ मैं जाता और मैं ही आता |
पर क्या अभी ऐसा ही नहीं है, ये तमाशा मेरा ही नहीं है,
और कहीं मैं ही तो तमाशबीन भी नहीं |
खैर जो चलती मेरी तो मैं दुनिया कुछ और बनाता,
या शायद कुछ ना बनाके सुनता समय का सन्नाटा |
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