हैं रूखे नक़ाब में छुपाये हुए क़यामत, की आज चाँद सितम ढ़ा रहा है
है छुपता कभी निकलता वो, शायद मेरा यार सितमगर आ रहा है I
दूँ सजा आज कायनात को मैं , की वक़्त अब कम बचा है |
कुछ भी तो नहीं बचा इंतज़ार में, रहम है खुदा का की थोड़ा सा दम बचा है |
है छुपता कभी निकलता वो, शायद मेरा यार सितमगर आ रहा है I
दूँ सजा आज कायनात को मैं , की वक़्त अब कम बचा है |
कुछ भी तो नहीं बचा इंतज़ार में, रहम है खुदा का की थोड़ा सा दम बचा है |
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